shiv tandav

शिव तांडव

shiva tandav stotra

 

shiva tandav stotra

shiva tandav stotra शिव तांडव स्तोत्र एक स्तोत्र (हिन्दू धर्म) में शिव की शक्ति और सौंदर्य का वर्णन करते हैं।यह परम्परा से रावण का, लंका के असुर राजा और शिव के उपासक का है.इस ग्रंथ के नवें और दसवां चौराहों में भी शिव के नामों के साथ-साथ मृत्यु के विनाशक, विनाशक के रूप में समाप्त होता है।हिन्दू-भक्ति काव्य के इस उदाहरण में एक अनुप्रास और अनुरणिका उत्पन्न करती है।कविता की अंतिम  में, जिसमें यह भजन एक ऐसा उदाहरण था, जो रावण को शिव शक्ति और दिव्य तलवार से प्राप्त हुआ था।

रावण बहुत से हिंदुओं के लिए एक सम्बल और जटिल व्यंक्ति हैं, जो बहुत से हिन्दू हैं, एक बहुत बड़ी बुद्धि का विद्वान है और पारंपरिक पाँच सही महिलाओं मंदोदरी का पति है।रावण ने माया की बेटी मंदोदरी की शादी की थी जो एक बहुत सुंदर और धार्मिक पत्नी थी।उनके पास मेघनाद नाम के एक पुत्र थे (जिसका अर्थ था बादल की आवाज़ या गड़गड़ाहट की आवाज़)।’मेघनाद’ ने देवराज के राजा इन्द्र को परास्त होकर इन्द्रजित का पद ग्रहण कर लिया।रावण के महान पिता ब्रह्मा (देवता) थे।

शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है अधिकतर लोग शिवलिंग की पूजा करते है कुछ ही लोग शिव की मूरति की पूजा करते है जब माता शती की मृत्यु हुई तब शिव जी ने शिव तांडव सुरु कर दिया और पृथ्वी पर इधर उधर भागने लगे जब वो ब्रामनास पहुंचे तो बहुत गुस्से में थे और और उन्हें श्राप देने लगे इसका परिणाम ये हुआ की शिव जी के शरीर से लिंगा अलग हो गया और पृथ्वी पर गिर पड़े पर लिंगा का बजन बहुत भारी था तो वो पृथवी पर सहा नही जा था इस घटना से तीनो लोको में हलचल हो गयी जब पृथ्वी की हालत ख़राब होने लगी तो सारे देवता और ऋषि ब्रम्हा जी के पास पहुंचे सहायता मागने के लिए.ब्रम्हा जी ने शिव जी का गुस्सा होने कारण जाना जब ब्रम्हा जी खुद और सारे ऋषि शिव जी के पास गए फिर ब्रम्हा जी ने शिव जी की आरधना की और कहा शिव जी आप अपना लिंगा वापिस पहन ले तब शिव जी ने कहा की यह पर जो सारे लोग है सब मेरे लिंगा से आराधन करे तभी में पहनुँगा जब ब्रम्हा जी ने सोने का शिवलिंग बनाया फिर सारे देवताओं ने शिवलिंग की मिलकर पूजा की तब जाकर शिव जी माने।

shiv tandav
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जोर से बोलो

ओम नमः शिवाये।

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