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शास्त्र ज्ञान : ऐसे १० लोग जो होते हैं गुरु तुल्य इनसे भी लेनी चाहिए जीवन की शिक्षा |

जय श्री राधे जाने जीवन रहस्य:ये जीवन रहस्य आपके बहुत काम आएंगे इनको जरूर पढ़े और अपने जीवन को सफल बनाएं | जय श्री सीताराम जी |

1. पुराना सेवक कभी अपने मालिक का बुरा नहीं चाहता। उसकी ईमानदारी पर विश्वास किया जा सकता है। अगर पुराना सेवक हमें कोई काम करने से रोके या हमारी भलाई के लिए कुछ कहे तो उसकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए न कि हवा में उड़ा देना चाहिए। हो सकता है कि उसकी सलाह हमारे काम आ जाए। ऐसी स्थिति में पुराने नौकर को भी गुरु के समान भी समझना चाहिए।

2. आचार्य उस ब्राह्मण को कहते हैं, जो शिष्य का उपनयन (मुंडन) संस्कार कर उसे अपने पास रखकर वेद का ज्ञान तथा यज्ञ आदि की विधि सिखाता है। आचार्य का पुत्र भी सम्माननीय होता है। यदि आचार्य पुत्र भी हमें शिक्षा दे तो उसे भी गुरु मानकर शिक्षा ले लेनी चाहिए। इसलिए आचार्य पुत्र को भी गुरु के ही समान कहा गया है।

3. अध्यापक वो होता है जो हमें वेद-विद्या आदि की शिक्षा देता है। अध्यापक के बारे में मनु स्मृति में लिखा है-
य आवृणोत्यवितथं ब्रह्णा श्रवणावुभौ।
स माता स पिता ज्ञेयस्तं न द्रुह्योत्कदाचन।।
अर्थात- वह ब्राह्मण माता-पिता के समान सम्माननीय होता है, जो वेद-विद्या पढ़ाकर अपने शिष्य के दोनों कानों को पवित्र करता है।
इस प्रकार ज्ञान देने वाला अध्यापक भी सम्मान करने योग्य होता है।

4. धर्मात्मा वो व्यक्ति होता है जो हमेशा धर्म के कामों में लगा रहता है। भूल से भी किसी का दिल नहीं दुखाता और दूसरों की मदद करता है। ऐसे व्यक्ति को भी गुरु के समान भी समझना चाहिए क्योंकि धर्मात्मा कभी किसी को गलत सलाह नहीं देगा। अगर धर्मात्मा व्यक्ति कभी कोई सलाह दे तो उसे भी गुरु के समान समझकर उसका पालन करना चाहिए|

5. यदि कोई व्यक्ति पवित्र आचरण यानी हमेशा अच्छे काम करने वाला है तो उससे भी शिक्षा ले लेनी चाहिए। अच्छे काम करने वाला व्यक्ति कभी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचेगा। अगर ऐसा व्यक्ति कोई सलाह दे तो उसे भी गुरु समझकर उसका आदर करना चाहिए।

6. हमेशा सच बोलने वाले व्यक्ति से भी शिक्षा लेनी चाहिए। सच बोलने वाला व्यक्ति यदि हमारा मार्गदर्शन करे या कोई उचित सलाह दे तो उसे भी गुरु मानकर उसकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।

7. मनु स्मृति के अनुसार समर्थ पुरुष से भी ज्ञान ले लेना चाहिए क्योंकि समर्थ पुरुष अपने निजी हितों के लिए कभी आपको गलत सलाह नहीं देगा। ऐसा व्यक्ति अगर कोई बात कहे तो उसे गुरु मान कर उस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

8. जो व्यक्ति नौकरी दे उससे भी शिक्षा लेने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। संकट की स्थिति में नौकरी देने वाले व्यक्ति से भी राय ले लेना चाहिए। ऐसा व्यक्ति सदैव आपको सही रास्ता दिखाएगा। इसलिए इसे भी गुरु ही मानना चाहिए।

9. जो व्यक्ति सदैव दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता हो उसे भी गुरु मानकर शिक्षा ली जा सकता है। ऐसा मनु स्मृति में लिखा है। परोपकार करने वाला व्यक्ति हमेशा सही रास्ता ही दिखाएगा।

10. जिनसे हमारे घनिष्ठ संबंध हों और जो सदैव हमारा भला चाहते हों, ऐसे रिश्तेदारों को भी गुरु मानना चाहिए। ऐसे रिश्तेदार यदि कोई काम करने से मना करे अथवा कोई सलाह दे तो उसे गुरु की आज्ञा मानकर उसका पालन करना चाहिए|
ये जीवन रहस्य आपके बहुत काम आएंगे इनको जरूर पढ़े और अपने जीवन को सफल बनाएं | जय श्री सीताराम जी |

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