शनि उपाए :श्री गणेश चतुर्थी मोहत्सव में सभी कस्टों से पानी है मुक्ति तो करें शनिवार के दिन ये उपाए ये है विशेष शनि उपाए इस बार गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर में |

शनि उपाए :श्री गणेश चतुर्थी मोहत्सव में सभी कस्टों से पानी है मुक्ति तो करें शनिवार के दिन ये उपाए ये है विशेष शनि उपाए इस बार गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर में |

शनिवार को इन आसान गणेश मंत्रों के ध्यान से होती है शनि कृपा:

व्यावहारिक रूप से संस्कार, स्वभाव या संगत के प्रभाव से नियत कर्म, विचार, व्यवहार भी इंसान के लिए वक्त व हालात मुश्किल बनाते हैं। चाहे फिर वह शरीर, मन या धन की पीड़ाएं क्यों न हो? इसलिए अच्छाई ही सुख का आधार बताई गई है। जिसे अपनानें में व्यर्थ तर्क व विचारों में नहीं पडऩा चाहिए।

वहीं इसी बात का धार्मिक स्वरूप जानें तो शास्त्रों के मुताबिक सूर्य पुत्र शनि कर्मां के मुताबिक जगत के सभी जीवों को दण्ड देते हैं। हालांकि उनकी सजा प्रताडऩा के रूप में समझी जाती है, बल्कि असल में यह दोष निवृत्ति व आत्म चिंतन का काल होता है।

बहरहाल, धार्मिक दृष्टि से शनि पीड़ा कुण्डली में बुरे ग्रह योग या शनि दशा या दोष से क्यों न हो? उसके शमन के लिए विशेष देवताओं की उपासना और काल का भी महत्व बताया गया है। इनमें भगवान श्री गणेश भी एक हैं।

मान्यताओं में शनि, शिव भक्त व श्री गणेश भी शिव पुत्र हैं। वहीं पौराणिक कथा के मुताबिक शनि की क्रूर नजरों से गणेश के सिर छेदन के बाद शनि, मां पार्वती द्वारा शापग्रस्त हुए, तब शनि ने शापमुक्ति के लिये भगवान विष्णु द्वारा बताई गणेश भक्ति की। यही कारण है कि गणेश पूजा शनि दोष का अंत करने वाली भी मानी गई है।

शनिवार शनि भक्ति का दिन है। यहां जाने श्री गणेश के कु छ छोटे-से मंत्र जिनका शनि मंदिर या गणेश मंदिर में बैठकर स्मरण करना परेशानियों और कष्ट-पीड़ा से मुक्त करता है –

– शनिवार को शनिदेव को सरसों तेल, काले तिल व सुगंधित फूल, काला वस्त्र तेल के पकवान का भोग चढ़ाएं। श्री गणेश को सिंदूर, चंदन, फूल व मोदक का भोग लगाकर धूप व तिल के तेल का दीप जलाएं व भगवान गणेश के इन मंत्रों का ध्यान करें या रुद्राक्ष माला से जप कर शनि व गणेश की आरती सुख की कामना से करें –

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गणेश्वराय ब्रह्मस्वरूपाय चारवे|
सर्वसिद्धिप्रदेशाय विघ्रेशाय नमो नम:।।

या

ॐ क्लीं ह्रीं विघ्रनाशाय नम:।

इस मंत्र का स्मरण करें।

– इस मंत्र स्मरण के बाद शनि व गणेश की आरती करें व दोनों देवताओं की कृपा की कामना करें।

गणेश चतुर्थी विशेष :

बोलें मात्र 1 अक्षर के गणेश मंत्र..आएगा सफलताओं का सैलाब
भगवान गणेश आदिदेव माने जाते हैं। इसलिए श्री गणेश परब्रह्म के पांच अलग-अलग रूपों में एक व प्रथम पूज्य भी हैं। हर शास्त्र ईश्वर की इन शक्तियों के कण-कण में बसे होने का संदेश देकर देवत्व भाव को अपनाने की सीख देता है। किंतु सांसारिक बंधन से स्वार्थ या दोषों के वशीभूत होकर हर जीव भटककर कलह और संताप पाता है।
ऐसी ही परेशानियों या मुश्किलों को सामना हम हर रोज घर या बाहर उठते-बैठते करते हैं। जिनसे छुटकारें के लिए अनेक तरीके अपनाते हैं। इनमें शास्त्रों में परब्रह्म स्वरूप भगवान गणेश के विराट रूप व शक्ति द्वारा जीवन को सफल व कलहमुक्त बनाने के लिए गणेश के बीज मंत्रों के स्मरण का भी महत्व है, जो कार्य व मनोरथसिद्धि में शक्तिशाली और असरदार भी माने गए हैं।

खास बात यह है कि पूजा-उपासना के अलावा अचानक मुसीबतों के वक्त भी मन ही मन इनका स्मरण संकटमोचन व कामयाबी का अचूक उपाय है। जानते हैं कौन-से ये छोटे किंतु प्रभावी गणेश एकाक्षरी बीज मंत्र –

– गं

– ग्लौं
और

– गौं

शास्त्रों के मुताबिक ये एकाक्षरी मंत्र अन्य गणेश नाम मंत्रों के साथ लेने पर बहुत ही मंगलकारी व मनोरथसिद्ध करने वाले हैं।

अगर आपकी धर्म और उपासना से जुड़ी कोई जिज्ञासा हो या कोई जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल पर टिप्पणी के साथ नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हमें भेजें।

समाप्त

। ॐ बुद्धिप्रियाय नमः ।

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