बुधवार के दिन क्या ऐसा करे जिससे भगवान श्री गणेश सरलता से हो प्रसन्न ?

बुधवार के दिन क्या ऐसा करे जिससे भगवान श्री गणेश सरलता से हो प्रसन्न ?

1.ॐ गं गणपतये नमः
ॐ-
ओंकार अर्थात भगवन श्री गणेश |ओंकार के उच्चारण मात्र से व्यक्ति की सभी मानसिक व शारीरिक व्याधि दूर होती है तथा ओंकार का उच्चारण प्रातः काल में स्वास को ऊपर व निचे की और करने से सम्पूर्ण दिन सरलता से सुखमये बीतता है यह बात’ महर्षि पतंजलि जी’ जिनके द्वारा योग ग्रन्थ का प्रारंभ हुआ है उन्होंने इस विधि को योग सूत्र द्वारा अपने ग्रंथो में इसका उल्लेख किया है|

यथा- ‘योगश्च चित्त वृत्ति निरोधा ‘ अर्थात योग द्वारा मानसिक तथा शारीरिक व्याधियाँ दूर होती हैं व परमात्मा के दिव्य दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त होता है| उनका यहाँ तक भी कहना है की जब योगी निरंतर योगाभ्यास करे व परमात्मा के दिव्य स्वरूपों का अपने मन में चिंतन करे तो वह व्यक्ति (योगी)परमात्मा के परम धाम को प्राप्त होता है उन्होंने तो यहाँ तक भी बताया है की वह व्यक्ति (योगी )अपनी मन इच्छा से कभी भी कही भी परमात्मा की इस सृस्टि में विचरण करपाता है व भगवान के चिंतन में ही लीन रहता है|
इसलिए भगवान श्री गणेश को ॐ के प्रतीक से भी जाना जाता है क्योकि उनको वरदान है सृस्टि कर्ता ब्रह्मा, श्री विष्णु तथा भगवान आदि योगी शिव जो उनके पिता हैं|

आप सब इस कथा से तो अवगत ही हैं जब भगवान शिव माँ पारवती जी के कक्ष में प्रवेश करना चाहते थे तभी उनके द्वारा अपने मैल(उबटन )से बनाए गए दैविक पुत्र श्री गणेश जी ने उनका रास्ता रोका जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने उनका मस्तक धड़ से अलग करदिया तथा यह देखकर माँ पारवती क्रोधित होकर माँ काली के रूप मे आगयी व पूरी सृस्टि में हाहाकार मचगया तब त्रिदेवो ने उनको शांत करने के लिए श्री गणेश के मस्तक की जगह १ हाथी के बच्चे का मस्तक लगा दिया और उन्हें प्रथम पूजन का भी वरदान दे दिया तभी से भगवान श्री गणेश जी को हर पूजन से पहले सर्व प्रथम पूजा जाता है और हर मंत्र के प्रारम्भ में ॐ का उच्चारण किये बिना मान्य नहीं होता तथा उसका कोई भी प्रभाव नहीं होता इसलिए हम ओंकार को भगवान श्री गणेश के प्रतीक के रूप में भी जानते हैं|

बुधवार को इस मंत्र का निरंतर जाप करने से बड़ी ही सरलता से भगवान श्री गणेश प्रसन्न होजाते हैं तथा सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं|

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