गुरुवार के दिन ये ५ कर्म करने से होसकते  हैं बृहस्पति भगवान नाराज़ ?

गुरुवार के दिन ये ५ कर्म करने से होसकते हैं बृहस्पति भगवान नाराज़ ?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:|

सर्व प्रथम बात करते हैं बृहस्पति भगवान कौन हैं |वैसे तो देवोंके गुरु महऋषि बृहस्पति देव गुरु को आप सब जानते होंगे |उनको ही बृहस्पति ग्रह से भी जाना जाता है अर्थात किसी की कुंडली में बृहस्पति ग्रह अच्छी इस्थिति में होता है तो उस व्यक्ति की कुंडली में राज योग बनजाता है |जिसके कारण उसको किसी भी वस्तु या धन इत्यादि की कभी कमी नहीं होती |परिवार सुखसम्पन्न रहता है उसके जीवन में सदैव खुशियों का आगमन रहता है |

परन्तु इतना ही नहीं है असल मे बृहस्पति भगवान श्री हरी विष्णु जी को कहा जाता है तभी हम बृहस्पतिवार को श्री विष्णु जी की पूजा करते हैं और अगर इस दिन एकादशी हो तो और भी सुबह माना जाता है |

इसलिए ये ५ काम न करे गुरुवार के दिन |

1.ना बाल धोएं ना कटाएं

शास्त्रों के अनुसार महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता है. इसका मतलब यह है कि गुरु ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है. ऐसे में गुरुवार को महिलाएं अगर अपना सिर धोती हैं या बाल कटाती हैं तो इससे बृहस्पति कमजोर होता है और पति व संतान की उन्नति रुक जाती है.

2.शेविंग और नाखून काटने की मनाही

गुरु ग्रह को जीव भी कहा जाता है. जीव यानी कि जीवन. जीवन से तात्पर्य है आयु. गुरुवार को नाखून काटने और शेविंग करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उम्र में से दिन कम हो जाता है.

3.घर में ना लगाएं पोछा

घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोने, कबाड़ घर से बाहर निकालने, घर को धोने या पोछा लगाने से बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है.

4.इस दिन लक्ष्मी को ना करें नजरअंदाज

गुरुवार को नारायण का दिन होता है, ये बात तो ठीक है. पर नारायण तभी प्रसन्न होंगे जब आप उनके साथ उनकी पत्नी यानी कि लक्ष्मी जी की भी पूजा करेंगे. गुरुवार को लक्ष्मी-नारायण दोनों की एक साथ पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं और पति-पत्नी के बीच कभी दूरियां नहीं आतीं. साथ ही धन में भी वृद्ध‍ि होती है.

5.खान पान का रखें खयाल

इस दिन चावल न खाये तथा किसी भी मादक पदार्थ के सेवन से बचे मॉस,मदिरा इत्यादि के सेवन तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए वरना इस कृत्या से भगवान श्री हरी तथा श्री (लक्ष्मी) जी नाराज़ होजाती हैं |

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